पृथ्वी का इतिहास – पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ?

पृथ्वी का इतिहास - पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ

पृथ्वी का इतिहास-पृथ्वी का जन्म और अन्य नव ग्रहों का जन्म, कब और कैसे, कितने वर्ष पहले हुआ: आज हम इसके बारे में विस्तार में पढ़ेंगे! लेकिन उससे पहले हम यह जानेंगे की पृथ्वी क्या है?

पृथ्वी क्या है?

पृथ्वी का इतिहास

पृथ्वी हमारे सौरमंडल का तीसरा ग्रह है, लेकिन जीवित प्राणियों के निवास के लिए, सबसे खास और एक मात्र ग्रह है, जो जल, थल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है। आज पृथ्वी पर हर कोई अपना जीवन जी रहा है, प्राणी, जीव-जन्तु, पशु-पक्षी, आज हम जीतने भी आकर्षित चीज़े देख रहें है धरती पर, नदी, झील, झरने, समुंदर, पहाड़, पर्वत, आकाश, पक्षियों का चहचहाना, जितना अद्भुत, चमत्कारी और अनोखा यह सब देखने और सुनने में लगता है, उससे कहीं ज़्यादा अद्भुत और चमत्कारी घटनाएँ आज से करोड़ों वर्षों पहले हुई थी।

अगर उस वक़्त वो चमत्कारी घटनाएँ ना होती, तो आज ना पृथ्वी होता, और ना हम में से, कोई भी यहाँ होता, अगर वो महाप्रलय नहीं आया होता, तो सोचो आज हम में से कोई भी यहाँ नहीं होता, और ना ही हमें इतना प्यार मानव जीवन मिला होता, और वो सभी भौतिक सुख सुविधाएँ जो हम भोग रहें हैं।

पृथ्वी का जन्म कब और कैसे हुआ?

आज से 454 करोड़ साल पहले, हुआ था, पृथ्वी का जन्म, और वो किसी अनोखे, अद्भुत चमत्कार से कम नहीं था, आखिर ऐसा कौन सा चमत्कार हुआ था जिससे हमारे पृथ्वी गृह का निर्माण हुआ, जिस जगह हमारा सौरमंडल है, वहाँ विभिन्न प्रकार के गैस और धूल से भरे बादल हुआ करते थे, जिन्हे हम Nebula cloud के नाम से जानते हैं।

Nebula Cloud: नेबुला बादल क्या है?

Nebula Cloud-निहारिका-नेबुला बादल

(नेबुला cloud मतलब नेबुला बादल) नेबुला का हिन्दी में अर्थ होता है: निहारिका, और cloud का मतलब बादल, नेबुला गैस, धूल और पलाज़मा से बना एक विशाल बादल होता है, यह कोई मामूली बादल नहीं है, यह तारों का घर होता है, सुनने में कितना सुंदर लग रहा है ना, बिल्कुल किसी परियों की कहानी की तरह, तारों का घर 😊 लेकिन यह सच है नेबुला cloud तारों का घर होता है, जो अक्सर तारों को जन्म, जीवन और मृत्यु से जोड़कर रखता है,

ये खगोलीय बादल हाइड्रोजन, हीलियम, और अन्य आयनित गैसों से मिलकर बने होते हैं, जो की हजारों प्रकाश की मात्र में फैला होता है। आज पृथ्वी में आपके आस पास दिखाई देने वाली, हर एक भौतिक चीज़, आज से अरबों साल पहले , बादलों में गैस और धूल के रूप में मौजूद थी। इन्ही cloud बादलों में एक अदृश्य चमत्कारी शक्ति छुपी हुई थी। जहाँ से जन्म हुआ हमारे सूर्य ग्रह का, पृथ्वी और अन्य सभी ग्रहों का, और उस अदृश्य चमत्कारी शक्ति का नाम है, (Gravity)

Gravity: गुरुत्वाकर्षण क्या है?

Gravity जिसका हिन्दी का अर्थ है, गुरुत्वाकर्षण: गुरुत्वाकर्षण एक ऐसा अदृश्य बल है, जो ब्रह्मांड में किसी ग्रह, या अन्य खगोलीय पिंड को या किसी दो वस्तुओं को एक दूसरे की और खींचने की ताक़त रखता है, जिसके खिंचाव से वस्तुएँ पृथ्वी की और नीचे की तरफ गिरती हैं, और ग्रहों को सूर्य की परिक्रमा करने में मदद मिलती है।

जिस पिंड का द्रव्यमान अधिक होता है, उसका गुरुत्व यानि गुरुत्वाकर्षण बल भी उतना ही अधिक होता है, गुरुत्वाकर्षण के कारण ही वस्तुओं या अन्य किसी भी चीज़ में भार उत्पन्न होता है, और खिंचाव पैदा करता है, और खिंचाव पैदा होने के कारण एक दूसरे से टकराने लगता है, इसी भार और खिंचाव के कारण ही, सभी ग्रह सूर्य के चारों और चक्कर लगाते हैं, (परिक्रमा करते हैं) आप इसके नाम से ही अंदाज़ा लगा सकते हैं, गुरुत्वाकर्षण का मतलब संस्कृत में “गुरुत्व” (भार अथवा भारीपन) और “आकर्षण” (अपनी और खींचने वाला बल) से मिलकर बना है गुरुत्वाकर्षण।

यह एक मात्र ऐसा चमत्कारी बल है, जो पृथ्वी पर वस्तुओं को गिरने, और क्षुदग्रहों को सूर्य के चारों ओर, या चंद्रमा को पृथ्वी के चारों और घूमने, चक्कर लगाने के लिए मजबूर करता है, यह अपने बल से किसी भी वस्तु, या ग्रह इत्यादि को अपनी और आकर्षित कर सकता है, उसे अपनी और खींच सकता है, और चक्कर लगवा कर, घूमा भी सकता है।

इसी Gravity गुरुत्वाकर्षण ने, इतनी सुंदर दुनिया का निर्माण किया, पेड़ पौधे, छोटे-छोटे, प्यारे-प्यारे पशु पक्षी, जानवर समुन्द्र, पहाड़, झील, झरने, नदी इत्यादि। अगर यह गुरुत्वाकर्षण ना होता तो, ना तो यह दुनिया बनती, और ना हम में से किसी का भी कोई अस्तित्व ना होता, इसी ग्रैविटी ने हमारी दुनिया का निर्माण किया।

पृथ्वी का इतिहास - पृथ्वी का निर्माण, प्रकृति,

जिस जगह हमारा सौरमंडल है, वहाँ गैस और धूल के बादल हुआ करते थे, इन बादलों मे स्थित रेडियोऐक्टिव नामक पदार्थ ने, ग्रैविटी का निर्माण किया, ग्रैविटी गुरुत्वाकर्षण यानि भार, अभी हमने ऊपर समझा उसके बारे में, गैस और धूल से बना ये सोलर नेबुला, (Nebula Cloud) इसी ग्रैविटी भार के कारण, अन्दर भीतर की और सिकुड़ने लगा और बीच में हाइड्रोजन और हीलियम इकठ्ठा करने लगा।

ग्रैविटी गुरुत्वाकर्षण

सूर्य का निर्माण

हाइड्रोजन और हीलियम इकठ्ठा होने की, यह प्रक्रिया तकरीबन करोड़ों सालों तक, ऐसे ही चलती रही, अत्यधिक मात्रा में इकठ्ठा होने के कारण, और अत्यधिक मात्रा मे सिकुड़ने के कारण, इस पर भयंकर दबाव पड़ने लगा, इस दबाव के कारण एकाएक अद्भुत चमत्कार होता है, इन धूल और गैस के बादलों से बहुत दूर मौजूद एक तारे में सुपरनोवा विस्फोट होता है, और उसी विस्फोट मे हमारे सूर्य ग्रह का निर्माण हुआ।

पृथ्वी का निर्माण

सूर्य के निर्माण होने के समय, जो विस्फोट हुआ था, उस विस्फोट होने के कारण, और साथ में ग्रैविटी की वजह से, अंतरिक्ष की ये बची हुई गैस और धूल, सूर्य के चारों और, एक दूसरे से टकराने और चिपकने लगी, और आपस में चिपककर उल्कापिंड (Meteorite) ठोस पत्थरों में परिवर्तित हो चुके थे। मतलब बड़े पिंडों का आकार लेने लगे थे, और सूर्य के करीब आकर, सूर्य ग्रह की परिक्रमा करने लगे, और परिक्रमा करते समय एक दूसरे पिंडों से टकराने लगे, और ऐसे ही करोड़ों सालों तक टकराते टकराते एक बड़े चट्टान के रूप में परिवर्तित हो गई, और वो थी पृथ्वी, इस प्रकार हमारी पृथ्वी का निर्माण हुआ।

चंद्रमा का निर्माण

जब सूर्य और पृथ्वी का निर्माण हुआ, जब यह प्रक्रिया हो रही थी, उसी दौरान थिया नामक ग्रह का निर्माण भी हुआ था, जिसे हमारा पड़ोसी ग्रह भी कहा जाता है, जब पिंड बड़े आकार में चट्टान का रूप लेकर पृथ्वी में परिवर्तित हो चुकी थी, उसी प्रक्रिया के दौरान उल्कापिंडों की बड़ी मात्रा मे, ठोस चट्टानों की बरसात हुई थी, उसी ठोस चट्टानों मे से आया था यह ग्रह, जिसका नाम था थिया।

थिया पृथ्वी की और बहुत तेज़ी से आता है, थिया की गति 15 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से पृथ्वी की तरफ़ आया, और आकर भयंकर तरीके से पृथ्वी से टकराता है, वैज्ञानिकों ने इस घटना को “जाइअन्ट इम्पैक्ट हाइपाथिसिस” (Giant Impact Hypothesis) नाम दिया, Giant मतलब बहुत बड़ा विशाल, Impact मतलब प्रभाव, Hypothesis मतलब परिकल्पना

इस भयंकर टकराव की वजह से, पृथ्वी के हिस्से कणों के रूप में तितर-बितर होकर अंतरिक्ष में फैल गए, और वहीं से हमारे एक और ग्रह का निर्माण हुआ, जिसे आज हम चंद्रमा बोलते हैं, लेकिन वो चंद्रमा आज के चंद्रमा की तरह बिल्कुल नहीं था, उस समय चंद्रमा पृथ्वी के इतने करीब था, की आज की तुलना के मुताबिक, करीब 15 गुणा से भी ज़्यादा बड़ा दिखाई देता था।

वैज्ञानिकों का कहना है: की थिया ग्रह का, पृथ्वी से टकराना एक भयानक घटना थी, लेकिन अगर इस घटना को हम एक इंसानी नज़रिये से देखें, तो वास्तव में किसी वरदान और चमत्कार से कम नहीं था, क्यूँ की इन्ही टकराव की वजह से हमारे हमारे चंद्र ग्रह का निर्माण हुआ, और साथ ही साथ इस बड़े भयंकर टकराव की वजह से हमारी पृथ्वी, अपनी अक्षरेखा से साढ़े तेईस डिग्री (23.5) झुक गई।

जिसकी वजह से आज हम सब जो अलग-अलग ऋतुओं का अनुभव करते हैं, जैसे : सर्दी, गर्मी, बरसात, पृथ्वी पर ये सभी मौसम/ ऋतुएं, पृथ्वी के अपने अक्षरेखा से झुकने के वजह से ही बदल पाती है, और माना जाता है की, पृथ्वी के इस झुकाव को चंद्रमा ने ही स्थिर रखा हुआ है।

पृथ्वी का निर्माण

अन्य नव ग्रहों का निर्माण

जब थिया ग्रह पृथ्वी पर ज़ोर से टकराया था, और चंद्रमा का निर्माण हुआ, उसी भयंकर टकराव के कारण बची हुई छोटी-छोटी उल्कापिंड और सूर्य के आस पास बची हुई गैस और धूल, फिर से टकराने और आपस में चिपकने लगी, और पृथ्वी के चारों ओर एक रिंग की आकार मे ढल गए, मतलब एक रिंग के आकार में एक घेरा बना लिया, और सूर्य की परिक्रमा करने लगे।

और अंतरिक्ष में फैले हुए ये कण, परिक्रमा करते हुए आपस में लगातार टकराते रहे, करोड़ों सालों तक ये प्रक्रिया यूँ ही चलती रही, और समय के साथ-साथ, वो रिंग एक दूसरे से टकराते- टकराते, फिर से अन्य ठोस पिंडों का आकार लेने लगे, और इन्ही पिंडों मे से निर्माण हुआ, हमारे अन्य सभी ग्रहों का मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, और अन्य सभी ग्रहों का ।

अभी तक उस सोलर नेबुला बादल Nebula Cloud से, पृथ्वी बनने के इस पूरे प्रोसेस में लगभग डेढ़ सौ (150) साल गुज़र चुके थे, धीरे धीरे पृथ्वी का निर्माण होने लगा था, सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा और अन्य सभी ग्रहों का निर्माण तो हो गया था, लेकिन यह पृथ्वी आज की तरह बिल्कुल नहीं थी, पृथ्वी की रफ़्तार, इतनी तेज़ी से घूम रही थी, कि उस समय पृथ्वी पर दिन और रात दोनों, लगभग 6 घंटों के हुआ करते थे, 3 घंटे का दिन, और 3 घंटे की रात हुआ करती थी।

संक्षेप:

इसी प्रकार हमारी पृथ्वी का निर्माण हुआ, ज़रा सोचिए, अगर करोड़ों साल पहले यह चमत्कारी घटनाएँ ना घटी होती , नेबुला बादल में गैस और धूल, और Gravity-गुरुत्वाकर्षण की वजह से ये विस्फोट ना होता, तो आज ना तो ये धरती होती, और ना हम में से कोई होता, ना हम ये आर्टिकल लिख रहे होते, और ना आप इसे पढ़ रहे होते 😊 धूल और गैस से निर्मित होकर, हमारे सूर्य, पृथ्वी, चंद्रमा और अन्य ग्रहों ने जन्म लिया, और हमे ये जीवन दिया। उन्हे सत-सत नमन 🙏

पृथ्वी के निर्माण के बाद, सबसे पहले किसने जन्म लिया था जानने के लिए, आप इसे समझ सकते हैं पृथ्वी पर सबसे पहले कौन सा जीव आया था – और कैसे जन्म हुआ?

कुछ महत्वपूर्ण सवाल और जवाब:

पृथ्वी का निर्माण कब, और कैसे हुआ?

हमारी पृथ्वी लगभग 454 करोड़ (या 4.5 अरब वर्ष पहले हुई थी) और Nebula cloud जिसे हिन्दी मे निहारिका कहते हैं, नेबुला बादल एक गैस और धूल से बना बादल होता है, और ग्रैविटी के कारण विस्फोट हुआ और हमारे सूर्य, पृथ्वी, चंद्रमा और अन्य ग्रहों का भी निर्माण हुआ, यह एक बहुत बड़ी विशाल रचना है, दो लाइन में इसका स्पष्टीकरण करना नामुमकिन है, आप विस्तार में पूर्ण रूप से समझ सकते हैं। पृथ्वी का इतिहास

सूर्य का जन्म पहले हुआ, या चंद्रमा का जन्म पहले हुआ था?

पहले सूर्य का जन्म हुआ, फिर पृथ्वी आया, और फिर चंद्रमा, गैस और धूल के बादल फटने पर एक तारे में विस्फोट हुआ, और वहीं से सूर्य ग्रह का निर्माण हुआ था, तो पहले सूर्य, फिर पृथ्वी का निर्माण हुआ, और फिर चंद्रमा और अन्य ग्रहों का निर्माण हुआ था

नेबुला क्लाउड-बादल क्या है?

नेबुला बादल तारों का घर होता है, यह अंतरिक्ष में धूल, हाइड्रोजन, हीलियम, और अन्य आयनित गैस से बना एक विशाल बादल होता है।

ग्रैविटी – गुरुत्वाकर्षण क्या होता है?

Gravity जिसका हिन्दी का अर्थ है गुरुत्वाकर्षण, और संस्कृत में “गुरुत्व” (भार अथवा भारीपन) और “आकर्षण” (अपनी और खींचने वाला बल) से मिलकर बना है गुरुत्वाकर्षण। गुरुत्वाकर्षण एक ऐसा अदृश्य बल है, जो ब्रह्मांड में किसी ग्रह, या अन्य खगोलीय पिंड को या किसी दो वस्तुओं को एक दूसरे की और खींचने की ताक़त रखता है, जिसके खिंचाव से वस्तुएँ पृथ्वी की और नीचे की तरफ गिरती हैं, और किसी भी वस्तु में भार उत्पन्न होता है, और खिंचाव पैदा करता है, और खिंचाव पैदा होने के कारण एक दूसरे से टकराने लगता है, इसी भार और खिंचाव के कारण ही, सभी ग्रह सूर्य के चारों और चक्कर लगाते हैं, (परिक्रमा करते हैं)

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