पृथ्वी पर महासागरों और समुद्रों का निर्माण, लाखों अरबों सालों पहले, आज से लगभग 4 अरब साल पहले हुआ था, और यह किसी अद्भुत चमत्कार से कम नहीं था, यह एक बहुत ही लंबी प्रक्रिया थी। पृथ्वी के निर्माण होने के बाद, कैसे पृथ्वी पर पानी आया, कैसे टेक्टोनिक प्लेटें अपनी जगह से खिसकने लगी, और फिर समय के साथ-साथ कैसे महासागरों और समुद्रों का निर्माण हुआ, आगे की हर एक घटना की पूरी कहानी जानेंगे, आज की इस लेख मे:
पृथ्वी पर महासागरों का निर्माण कैसे हुआ था?
पृथ्वी के निर्माण होने के बाद, पृथ्वी आज की तरह रहने लायक बिल्कुल भी नहीं थी, थी तो सिर्फ चट्टानें। ना हवा, ना पानी, और ना ही साँस लेने के लिए ऑक्सीजन था, पृथ्वी के जन्म होने के बाद, लगभग 1.5 अरब सालों तक उल्कापिंडों और धूमकेतु द्वारा पृथ्वी पर पानी लाया गया,
विषय-सूची
उल्कापिंडों और धूमकेतु का योगदान
जब-जब उल्कापिंड, धूमकेतु और क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराते, तब-तब यह पृथ्वी पर पानी लाते थे, क्यूँकी इन खगोलीय पिंडों में बर्फ और पानी भरपूर मात्रा में मौजूद थी, पृथ्वी के निर्माण होने के बाद, समय गुज़रता जा रहा था, लेकिन हर पल, कुछ न कुछ नई हलचल होने लगती थी, उल्कापिंडों और धूमकेतु द्वारा लाए गए पानी की वजह से, पृथ्वी के ऊपरी सतह पर पानी जमने लगा था, और पृथ्वी की सतह पर पानी होने के कारण पृथ्वी ठंडी हो जाती थी।
पृथ्वी का गरम होना
पृथ्वी के ठंडे हो जाने के बावजूद, कहीं न कहीं पृथ्वी के भीतर की गर्मी, उसकी भीतरी तपिश, बाहर ना आ पाने के कारण, अंदर ही अंदर पृथ्वी ने उस गर्मी को, लाखों सालों तक अपने अंदर समाए रखा, और फिर एकाएक पृथ्वी की भीतरी गर्मी ज्वालामुखियों के रूप में विस्फोट होने लगी।

ज्वालामुखियों का विस्फोट होना
एक के बाद एक ज्वालामुखी विस्फोट होती जा रही थी, और पृथ्वी अब पहले से भी ज्यादा गरम, और लावे की तरह उबलने लगी थी, निरंतर ज्वालामुखियों के विस्फोट होने के कारण, पृथ्वी के अंदर एक भयंकर हलचल हुई, और इस हलचल के दौरान, पृथ्वी के टेक्टोनिक प्लेटें आपस में खिसकने लगी।
टेक्टानिक प्लेटों का खिसकना
टेक्टोनिक प्लेटों के बार-बार खिसकने के कारण, पृथ्वी मे भयंकर दरारें आने लगी, और इस प्रकार हमारी पृथ्वी कई हज़ारों हिस्सों में, अलग-अलग परतों मे बंटने लगी, और यह घटना लाखों वर्षों तक ऐसे ही चलती रही, और लगातार दरारें आने की वजह से, पृथ्वी के अंदर का लावा, अब खुले में उबलता रहा, जैसे की आप चित्र में देख पा रहे हैं। 👇

गैस, और धुएं का बादल बनना
लगातार खुले में लावा उबलने के कारण, और बार-बार ज्वालामुखियों के विस्फोट होने के कारण, पृथ्वी के चट्टानें पिघलने लगी, और जलवाष्प (भाप) गैस और धुएं के कारण, पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा तेज़ी से बढ़ने लगी, और धीरे-धीरे ये भाप, गैस और धुएं, बादलों के रूप मे एकत्र हो गए।

और समय के साथ-साथ, जैसे-जैसे पृथ्वी ठंडी होने लगी, कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ी होने के कारण, उन दूषित गैस और धुएं से बने बादलों ने, पृथ्वी पर (Acid rain) अम्ल वर्षा करनी शुरू कर दी।
Acid Rain-अम्ल वर्षा क्या होती है?
Acid rain, अम्ल वर्षा का मतलब, सचमुच की तेजाब वाला ऐसिड नहीं होता है, जब दूषित गैस, और धुएं/प्रदूषण से बनी वर्षा होती है, तो वह दूषित और जहरीली वर्षा कहलाती है, इसलिए उसे (acid rain) यानि अम्ल वर्षा कहा जाता हैं। जैसे एक सामान्य वर्षा का मापन pH लगभग 5.6 होता है, और वहीं 5.6 से कम pH वाली वर्षा को, थोड़ी मात्रा मे अम्लीय वर्षा कहा जाता है, जो थोड़ी अम्लीय होती है, (अम्लीय वर्षा का pH लगभग 4.0 से 4.5 के आसपास होने पर acid rain कहलाती है)

वर्षा का जमा होना
लाखों वर्षों तक, लगातार मूसलाधार वर्षा होती रही, और यह वर्षा का पानी, पृथ्वी के निचले स्थानों मे, एवं गड्ढों में एकत्र होते जा रहे थे, और लाखों वर्षों तक यह प्रक्रिया, यूँ ही चलती रही, जिसके वजह से समय के साथ-साथ यह गड्ढे भरते चले गए, और विशाल महासागरों में बदल गए, और इसी प्रकार से ऐसे ही धीरे धीरे, हमारी पृथ्वी पर महासागरों, समुद्रों और बाकी सभी अन्य जलाशयों का भी निर्माण होता चला गया।

पृथ्वी का हिमयुग मे जाना
लेकिन लाखों वर्षों तक, लगातार मूसलाधार वर्षा होने की वजह से, और वायुमंडल में फैली कार्बन डाइऑक्साइड की वजह से, पृथ्वी का तापमान इतना कम हो गया, की माइनस 60°F डिग्री सेल्सियस पर चला गया, और हमारी पृथ्वी Ice age में चली गई, जिसे हम हिमयुग कहते है: और अब तक के इस सफर मे पृथ्वी के 300 करोड़ साल गुज़र चुके थे।
टेक्टोनिक प्लेटों की मुख्य भूमिका
टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार तेज़ गति ने, महासागरों और महाद्वीपों को आकार देने मे, अपनी सबसे मुख्य भूमिका निभाई थी, जिससे आज विभिन्न-विभिन्न महासागरों और महाद्वीपों को रूप मिला, टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने के कारण, बार बार भूकंप का आना, ज्वालामुखियों का लगातार विस्फोट होना, अगर टेक्टानिक प्लेटें बार-बार अपनी जगह से ना खिसकती, तो ना तो पृथ्वी मे दरारें आतीं, और ना ही पृथ्वी अलग-अलग हिस्सों में विभाजित होती, टुकड़ों में बँटती, और ना ही महासागरों, पर्वतों, और आगे जाकर महाद्वीपों को आज का स्वरूप मिलता।
संक्षेप:
शुरुआती समय में, उल्कापिंडों और धूमकेतु द्वारा पानी का लाना, ज्वालामुखियों का विस्फोट होना, गैस और धुएं का बादल बनना, लाखों वर्षों तक मूसलाधार वर्षा का होना, टेक्टोनिक प्लेटों का खिसकना, पृथ्वी का अलग-अलग हिस्सों में विभाजीत होना, गड्ढे बनना, और उन गड्ढों का वर्षा से भरना, इसी प्रक्रिया से हमारे पृथ्वी के निर्माण होने के बाद, महासागरों, समुद्रों, महाद्वीपों और अन्य जलाशयों की उत्पत्ति हुई 😊
पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ, जानने के लिए – आप इसे पढ़ सकते हैं: पृथ्वी का इतिहास – पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ? अगर आपको यह जानने में रुचि है, कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम जीव का निर्माण कैसे हुआ था? तो आप इस लेख को पढ़ सकते हैं 👉 पृथ्वी पर सबसे पहले कौन सा जीव आया था – और कैसे जन्म हुआ?
कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और जवाब:
उल्कापिंड और धूमकेतु क्या है?
उल्कापिंड एक विशिष्ट प्रकार के चट्टानी पिंड होते है, यह एक छोटा, ठोस पिंड होता है, कभी-कभी बड़ा भी हो सकता है, जो की अक्सर किसी बड़े खगोलीय पिंड से टूटकर, अलग हुआ एक टुकड़ा होता है, इसके अलावा यह चट्टान, धातु, गैस, धूल और कार्बन से बना एक हिस्सा भी हो सकता है, जो अंतरिक्ष में पाया जाता है, या अंतरिक्ष से धरती पर आता है। और धूमकेतु बर्फ, गैस, धूल और चट्टानों से बनी, छोटे जमे हुए बर्फीले पिंड होते हैं, इसलिए धूमकेतु जब भी धरती पर आते हैं, अपने साथ भरपूर मात्रा में पानी लेकर आते हैं।
खगोलीय पिंड क्या है?
खगोलीय पिंड, जिसमें तारे, ग्रह, चंद्रमा, क्षुद्रग्रह, उल्कापिंड, और धूमकेतु शामिल होते हैं, यह पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर मौजूद, ब्रह्मांड की किसी भी प्राकृतिक वस्तु को कहते हैं, जो अंतरिक्ष में पाई जाती है, खगोलीय पिंड मे वे सभी चीजें आती हैं, जो सूर्य या किसी अन्य ग्रह की परिक्रमा करते हैं, जैसे : तारे, सूर्य, पृथ्वी, चंद्रमा अथवा अन्य ग्रह, उल्कापिंड, धूमकेतु और क्षुद्रग्रह।
टेक्टोनिक प्लेटें क्या होती है?
टेक्टोनिक प्लेटें, विभिन्न चट्टानी भागों से बनी होती है, पृथ्वी के बड़े ठोस चट्टान की पटिया होती हैं, जिसे हम अक्सर पत्थर की सिल्ली भी कहते हैं, जो पृथ्वी के भीतर होती है, ये प्लेटें विभिन्न आकार की भी हो सकती हैं, और यह स्थिर नहीं होती है, ये प्लेटें पृथ्वी के अंदर धीरे-धीरे गति मे चलती रहती हैं, अक्सर प्रति वर्ष कुछ सेंटीमीटर की दर से। और इनकी तेज़ गति होने पर, भूकंप, ज्वालामुखी जैसे विस्फोट होते हैं, और पहाड़ों के निर्माण, महासागरों के निर्माण और महाद्वीप के निर्माण करने मे अपनी मुख्य भूमिका निभाते हैं।
क्या महासागर और महाद्वीप एक हैं?
नहीं, महासागर और महाद्वीप बिल्कुल भी एक नहीं हैं, महासागर विशाल, गहरा खारे पानी से भरा भंडार होता है, जो पृथ्वी के 71% हिस्से को ढके हुए हैं, और वहीं, महाद्वीप पृथ्वी के बड़े क्षेत्र यानि ज़मीन के विशाल टुकड़े होते हैं, जो की पृथ्वी के 29% हिस्से को ढके हुए हैं, संक्षेप: महासागर जल के भंडार हैं, और महाद्वीप जमीन के विशाल टुकड़े हैं, इसलिए दोनों एक नहीं होते हैं।
पहले महासागरों का निर्माण हुआ था? या महाद्वीपों का?
पहले महासागरों का निर्माण हुआ था, उसके बाद धीरे-धीरे महाद्वीपों का निर्माण हुआ, पृथ्वी पर लगभग 4 अरब साल पहले, पृथ्वी जब ठंडी होने लगी और उल्कापिंडों और धूमकेतु द्वारा पानी लाया गया, और लाखों वर्षों तक मूसलाधार वर्षा होने पर, पहले महासागरों का निर्माण हुआ, और टेक्टोनिक प्लेटों की तेज़ गति से खिसकने, और टकराने के कारण, पृथ्वी को कई विभाजीत रूप में अलग-अलग कर दिया, इस प्रकार महाद्वीपों का निर्माण हुआ, जैसे : पहले पैंजिया जैसे विशाल महाद्वीप बने, और फिर वे टूटकर आज के आधुनिक महाद्वीपों में बदल गए, (समय के साथ-साथ, यह टेक्टोनिक प्लेटें अलग होती और टकराती गई, अलग होने और टकराने की इस प्रक्रिया से, पुराने महाद्वीपों को तोड़ती रही है, और नए आधुनिक महाद्वीपों का निर्माण करती रही) इसलिए पैंजिया के टूटने, और धीरे-धीरे फैलने से, आज के महाद्वीप बनें हैं।
पृथ्वी पर, पूरे विश्व में कितने महासागर है?
पृथ्वी पर या पूरे विश्व मे, पाँच प्रमुख महासागर हैं, जैसे प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, आर्कटिक महासागर, और दक्षिणी महासागर (इसे अंटार्कटिक महासागर के नाम से भी जाना जाता है)
पृथ्वी पर कितने महाद्वीप है?
पृथ्वी पर कुल सात महाद्वीप हैं, जैसे एशिया महाद्वीप, अफ्रीका महाद्वीप, उत्तरी अमेरिका महाद्वीप, दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप, अंटार्कटिका महाद्वीप, यूरोप महाद्वीप, ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप।
पृथ्वी पर कितने समुद्र हैं?
पृथ्वी पर लगभग 100 या उससे भी अधिक समुद्र हैं, जो महासागरों के भीतर ही स्थित होते हैं, यानि समुद्र महासागर का ही एक हिस्सा होते हैं, पृथ्वी पर पाँच मुख्य महासागर है, और समुद्र उन्ही महासागरों का एक अंग है।
क्या महासागर और समुद्र दोनों एक हैं?
नहीं महासागर और समुद्र दोनों एक नहीं हैं, महासागर एक बहुत गहरे और खुले पानी का, बहुत बड़ा भंडार है, संक्षेप में: महासागर बहुत बड़े विशाल रूप मे, और गहरे होते हैं, और पृथ्वी के बड़े हिस्सों को कवर करते हैं, और समुद्र महासागर की तुलना मे छोटे और कम गहरे होते हैं, समुद्र महासागर के छोटे हिस्से होते हैं, जो जमीन से जुड़े होते हैं।
महासागर और समुद्र में अंतर?
महासागर एक विशाल गहरा जल का भंडार होता है, और समुद्र महासागर के मुक़ाबले मे बहुत ही कम गहरे होते हैं, लेकिन अक्सर किसी महासागर का ही हिस्सा होते हैं, संक्षेप: सागर का मतलब एक रूप मे, समुद्र ही होता है, अब सागर के आगे महा लगा कर सोचिए, क्या बना? इसलिए हम कह सकते हैं, महासागर एक पिता स्वरूप है, जो विशाल होता है, और समुद्र उसके बच्चे स्वरूप हैं, जो महासागरों से निकल कर आते है। जैसे एक बाल्टी पानी में, एक गिलास पानी का होना, लेकिन गिलास का पानी, उसी बाल्टी का हिस्सा है। आशा करते हैं: कि आपको महासागर और समुद्र मे अंतर समझ में आ गया होगा। समुद्र अलग जरूर है, लेकिन महासागर का ही एक हिस्सा है।



